काम की तलाश में आया परिवार 2 साल से शौचालय में रहने को मजबूर

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आंधप्रदेश में सात सदस्‍यों का एक दलित परिवार दो साल से एक सामुदायिक शौचालय परिसर में रह रहा है। यह परिवार अर्कालगुड से यहां आजीविका की तलाश में आया था। हासान में ये लोग एक शौचालय में रह रहे हैं। पचास वर्षीय रमेश ने बताया कि वर्षों पहले उनका पैतृक घर बच्‍चों की परवरिश के लिए बिक गया। अब उनके पास कुछ नहीं है। बीस साल पहले ही उस जगह को छोड़ना पड़ा। कई जगह रहने के बाद तीन साल पहले वह अर्कालगुड पहुंचा। रमेश ने बताया कि वह निर्माण कार्य और सफाई काम करता है और महीने में तीन हजार रुपए कमा लेता है। बड़े परिवार को पालने के लिए यह आय पर्याप्‍त नहीं है। यहां वह सार्वजनिक शौचालय के निर्माण कार्य में लगे लोगों के संपर्क में आया। उन्‍हें काम संभालने के लिए आदमी की तलाश थी। रमेश को काम मिल गया। तबसे वह यहां रह रहा है। उसके पांच बच्‍चों में से सबसे छोटा केवल डेढ़ महीने का है। स्‍थानीय अखबार में यह खबर छपने के बाद कुछ लोग उसकी मदद को आगे आए। लोगों ने उसे एक सरकारी जगह दिखाई जहां मकान बनाया जा सकता है। व्‍यापारी वर्ग ने इसमें लगने वाली सामग्री की मदद की। रमेश का कहना है कि सबने उसकी सुध ली, इससे वह खुश है। जल्‍द ही यहां उसका अपना एक घर होगा।

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