क्या PM मोदी और मीडिया की खिल्ली उड़ाने वाला ये कार्टून TIME के कवर पर छपा?

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दिन भर में 8-10 अफवाहें वायरल करने वाली वॉट्सऐप यूनिवर्सिटी ने नया रायता फैलाया है. वॉट्सऐप और सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक कार्टून रगड़ के शेयर किया जा रहा है, जिसमें वो अपनी 56 इंची छाती से मीडिया को दूध पिलाते दिख रहे हैं. कार्टून में महिला के कपड़ों में दिखाए गए मोदी के हाथ में ‘कॉरपोरेट कैंपेन डोनेशन’ का बैग है और मीडिया को बच्चा दिखाया गया है. सबसे बड़ी बात, ये कार्टून अमेरिकी मैगजीन ‘TIME’ के कवर पर छपा दिखता है.

वॉट्सऐप पर समोसे के साथ बैंगनी चटनी खाने का फायदा बताने वाली जनता ‘TIME’ मैगजीन नहीं पढ़ती. मैगजीन मिल भी जाए, तो वो उसमें सिर्फ टिंडे का मुरब्बा बनाने की विधि ढूंढती है. गूगल और फेसबुक के आशीर्वाद से मैगजीन का कवर देखने को मिल जाता है, तो उसके साथ ऐसी छीछालेदर कर दी जाती है.

तो क्या है असल कार्टून

TIME मैगजीन ने मोदी को लेकर ये कार्टून कभी छापा ही नहीं. मई 2012 में मैगजीन ने जो असल कार्टून छापा था, उसमें एक महिला को बच्चे को दूध पिलाते दिखाया गया था. महिला से इशारा उन कॉरपोरेट कंपनियों की तरफ था, जो चुनाव में पार्टियों को डोनेशन देती हैं और दूध पीते बच्चे से इशारा रिपब्लिकन पार्टी कांग्रेस की तरफ था. बच्चे की पीठ पर लिखे GOP का फुलफॉर्म ‘ग्रैंड ओल्ड पार्टी’ है. इसे रिपब्लिकन पार्टी के लिए इस्तेमाल किया जाता है.

डेविड होर्सी का बनाया वो असल कार्टून, जो मई 2012 में TIME के कवर पर छपा था

इस कार्टून का मतलब क्या है

हमारे यहां चुनाव में ढेर सारी पार्टियां होती हैं, जिनकी अलग-अलग विचारधाराएं होती हैं, लेकिन अमेरिका में दो ही धड़े होते हैं. रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक, जिनकी अदावत सैकड़ों साल पुरानी है. राजनीति में पैसा मां के दूध की तरह ही होता है. तो कार्टून का मकसद ये बताना था कि कैसे अमेरिका में बड़े कॉरपोरेशन मां की तरह रिपब्लिक पार्टी (बच्चे) को दूध पिलाकर (पैसे देकर) आगे बढ़ा रहे हैं. TIME मैगजीन में ये कार्टून मई 2012 के अंक में छपा था.

किसने बनाया था कार्टून

ये कार्टून डेविड होर्सी ने बनाया था, जो ‘लॉस एंजिलिस टाइम्स’ के पॉलिटिकल कमेंटेटर हैं. दो बार पुलित्जर अवॉर्ड जीत चुके डेविड एडिटोरियल कार्टूनिस्ट और कॉलमिस्ट हैं. पॉलिटिकल रिपोर्टर के तौर पर जर्नलिज्म शुरू करने वाले डेविड यूरोप, जापान और मेक्सिको जैसे कई देशों में असाइनमेंट कर चुके हैं. उनके बनाए कार्टून्स की आठ किताबें भी छप चुकी हैं. डेविड हर साल मोंटाना में कुछ सप्ताह एक काउबॉय की तरह बिताते हैं.

दो बार पुलित्ज़र अवॉर्ड जीत चुके कार्टूनिस्ट डेविड होर्सी

कार्टून का मकसद क्या था

डेविड इस कार्टून के जरिए ये बताना चाहते थे कि अब कॉरपोरेशन को ये बताने में कोई झिझक नहीं है कि उनका फेवरेट कौन है. अब वो डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन में से अपना फेवरेट चुनने लगे हैं. एक मां की तरह वो अपना बच्चा चुनेंगे, उसे खुश और फिट रखेंगे और फिर बदले में उससे एक ही चीज लेंगे कि उनका बच्चा उनकी हर बात माने.

इसमें मोदी कहां से आ गए

मई 2017 में सूचना-प्रसारण मंत्रालय ने एक RTI के जवाब में बताया कि 1 जून 2014 से 31 अगस्त 2016 के बीच केंद्र सरकार ने पीएम मोदी के विज्ञापनों पर 1,100 करोड़ रुपए खर्च किए. ऐसे कई तथ्य हैं, जिनके आधार पर मोदी पर पैसों के जरिए मीडिया को प्रभावित करने का आरोप लगता रहा है. यही आरोप भुनाने के लिए TIME के कार्टून पर मोदी की शक्ल चिपका दी गई. इससे लगता है कि मोदी मीडिया पर पैसे बहा रहे हैं. आंकड़े भले इस बात को सही साबित करते हों, लेकिन ये कार्टून असल नहीं है. इसे सही मानकर शेयर मत कीजिए. शेयर कर रहे हैं, तो इसकी असलियत के बारे में भी लोगों को बताइए.

अखबारों में नरेंद्र मोदी की तस्वीरों के साथ विज्ञापन

पर इससे पहले TIME के कवर पर आ चुके हैं मोदी

दुनिया में ढेर सारे ऐसे नेता हैं, जिनके अंदर TIME के कवर पर छपने की हसरत है. मोदी का ये कार्टून भले फर्जी हो, लेकिन वह तीन बार TIME के कवर पर आ चुके हैं. यह बताता है कि वैश्विक स्तर पर मोदी कितने प्रासंगिक हैं. देखिए TIME के वो तीनों कवर:

मई 2015, जून 2014 और मार्च 2012 के अंक में TIME के कवर पर मोदी (बाएं से दाएं)

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