सिर मुंडाते ही ओले पड़े- प्रियंका फेल, रुकेगा राजनीतिक आगाज?

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मोदी लहर ने न केवल राहुल गांधी के राजनीतिक रास्ते को और मुश्किल बनाया बल्कि congress में दूसरी बड़ी हैसियत रखने वाली प्रियंका गांधी के आगाज को रोक दिया. UP election के दौरान कांग्रेस और सपा के बीच गठबंधन में प्रियंका गांधी ने बड़ी भूमिका निभाई थी. खुलकर उन्होंने गठबंधन कराने की कमान थामी थी और सफल भी रही थीं. पर उनकी सफलता election results में नहीं झलक सकी. सपा के साथ congress भी डूब गई.

क्यों मुश्किल में प्रियंका की पॉलिटिक्स में एंट्री
प्रियंका गांधी को कई बार राहुल के मुकाबले कांग्रेस की कमान देने की बात कई कांग्रेसी नेता करते रहे हैं. हालांकि, प्रियंका ने खुद को रायबरेली तक सीमित रखा. राजनीति में आने के सवालों को वे लगातार टालती रहीं. पहली बार उन्होंने खुलकर राजनीति करने के लिए यूपी का विधानसभा चुनाव चुना. भले ही प्रचार में नहीं उतरीं पर कम से कम रणनीतिक स्तर पर कांग्रेस के लिए जमीन तैयार करने कि कोशिश की. उन्होंने आगे आकर अखिलेश और उनकी पत्नी डिंपल यादव से बात की. दोनों दलों के बीच में हुए गठबंधन में उनकी अहम भूमिका रही. कांग्रेस की ओर से पहली बार किसी बड़े नेता (अहमद पटेल) ने ट्वीट कर कहा था- कांग्रेस-सपा गठबंधन में हाई कमान लेवल और PG (प्रियंका गांधी) ने अहम भूमिका निभाई. कांग्रेस कभी नहीं चाहेगी कि प्रियंका गांधी विफलता के साथ कमान संभालें.

फेल हुई प्रियंका-डिंपल की जोड़ी
कहा जाता था कि सपा से गठबंधन के लिए पहले प्रशांत किशोर कांग्रेस की ओर से बात कर रहे थे. पर दिसंबर और जनवरी के आखिरी दिनों में प्रियंका गांधी ने खुद कमान संभाली थी. राहुल गांधी आगे नहीं आए थे. प्रियंका गांधी ने अखिलेश से ज्यादा डिंपल यादव से बात की और दोनों पार्टियों के बीच गठबंधन हो गया. कहा जाता है कि ऑफ द बीट प्रियंका और डिंपल की जोड़ी अच्छी थी, पर वे चुनाव में कमाल नहीं कर सकी.

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