१० करोड़ मंत्रियों को मिलते रहे, अफसरों ने भी कूटा माल

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व्यापमं महाघोटाला… कई बड़े मगरमच्छ अभी भी चंगुल से बाहर…सीबीआई ने खोल डाली एसटीएफ की पोलपट्टी

इंदौर, राजेश ज्वेल।
व्यापमं महाघोटाले का भूत एक बार फिर जाग गया है, जो शिवराज सरकार की नींद उड़ा रहा है और विधानसभा में भी इसको लेकर हल्ला मचेगा। पीएमटी 2012 के ही फर्जीवाड़े में सीबीआई ने इंदौर-भोपाल के निजी मेडिकल कॉलेजों के रसूखदारों को आरोपी बनाते हुए गिरफ्तारियां शुरू कर दी है। इंदौर के इंडेक्स कॉलेज के चेयरमैन अरुण अरोरा को जेल भेज दिया, तो भोपाल के चिरायु कॉलेज के वीरेन्द्र कुमार को भी धर दबोचा। मोदी जी की सीबीआई ने एसटीएफ की पोलपट्टी खोलकर रख दी कि उसने किस तरह असल रसूखदार आरोपियों को बचाते हुए गोलमोल जांच की। पीएमटी के साथ डीमैट परीक्षा का गोरखधंधा भी अब सीबीआई उजागर करेगी, जो इससे भी बड़ा घोटाला है। अभी भी सीबीआई के चंगुल से कई बड़े मगरमच्छ बचे हैं, वहीं इस घोटाले को उजागर करने वालों का कहना है कि हर स्वास्थ्य मंत्रियों को मिलने वाले 10-10 करोड़ रुपए के मामले की भी जांच कराई जाए और कई अफसरों ने भी तगड़ा माल कूटा, जिसमें एसटीएफ के आला अधिकारी भी शामिल रहे हैं।

अभी तक पीएमटी-2012 का ही फर्जीवाड़ा उजागर, डीमैट परीक्षा का गोरखधंधा इससे भी कई गुना बड़ा

अभी तक भले ही कांग्रेस देश के इस सबसे बड़े घोटाले को जोरदार तरीके से भुना नहीं पाई है, मगर बीच-बीच में इस घोटाले के भूत प्रदेश की शिवराज सरकार को डराते जरूर रहे हैं। दो साल पहले भी दिल्ली के एक टीवी पत्रकार की मौत के बाद बड़े न्यूज चैनलों ने इस महाघोटाले को पहली बार जमकर उछाला, जिसके चलते शिवराज सरकार को सुप्रीम कोर्ट में यह लिखकर देना पड़ा कि वह सीबीआई जांच करवाने को तैयार है। उसके पहले तक मुख्यमंत्री सीबीआई जांच की मांग से ही साफ इनकार करते रहे और अपने प्रदेश की पुलिस पर ही भरोसा जताते रहे और चल रही एसटीएफ जांच को उन्होंने बेहतर भी बताया। सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के बाद सीबीआई ने इस व्यापमं महाघोटाले की जांच-पड़ताल शुरू की और 500 से अधिक आरोपियों को चिन्हित किया, वहीं कई लोगों को अपनी जांच से बाहर करते हुए क्लीनचिट भी दे दी, जबकि एसटीएफ ने उनको भी आरोपी बना लिया था। अभी पिछले दिनों सीबीआई ने जो नई चार्जशीट पीएमटी 2012 के घोटाले को लेकर कोर्ट में प्रस्तुत की, उसमें 200 से ज्यादा नए आरोपी शामिल हुए, जिसमें 4 बड़े निजी मेडिकल कॉलेजों के कर्ताधर्ता भी शामिल रहे हैं।
इनमें पिपुल्स मेडिकल कॉलेज, इंडेक्स मेडिकल, चिरायु और एलएन मेडिकल कॉलेज शामिल रहे हैं। अब इनके कर्ताधर्ता अग्रिम जमानत पाने के लिए हाथ-पांव पटक रहे हैं। दो दिन में सीबीआई ने इंडेक्स और चिरायु मेडिकल कॉलेज से जुड़े दो आरोपियों को तो गिरफ्तार कर लिया है। इस मामले में प्रदेश के आला अधिकारियों की मिलीभगत के प्रमाण भी अब सामने आने लगे हैं। आईएएस अधिकारी अजय तिर्की और एसएस कुमरे के खिलाफ तो सीबीआई ने विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की ही है, वहीं इस महाघोटाले को उजागर करने वालों का आरोप है कि अभी भी कई रसूखदार सीबीआई चंगुल से छुटे हुए हैं। यह भी उल्लेखनीय है कि पीएमटी के साथ-साथ अब डीमैट का घोटाला भी उजागर होना है। इसकी भी सीबीआई जांच की मंजूरी अभी तक प्रदेश सरकार ने नहीं दी है। व्यापमं महाघोटाले को उजागर करने वालों में शामिल नागदा के अभय चोपड़ा का कहना है कि अब मनी लॉन्ड्रिंग के तहत भी इन रसूखदारों की जांच-पड़ताल होना चाहिए। साथ ही एसटीएफ ने व्यापमं के पूर्व डायरेक्टर और डीमैट के को-आर्डिनेटर और कोषाध्यक्ष योगेश उपरित को भी गिरफ्तार किया था, जिसने निजी मेडिकल कॉलेजों की अरबों की कमाई के काले राज भी उजागर किए। बाद में केंसर के मरीज होने के कारण उपरित को जमानत मिली, उसने एक बड़ा खुलासा यह भी किया था कि मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य मंत्री की कुर्सी संभालते ही 10 करोड़ रुपए की राशि मंत्री को दे दी जाती थी। अन्य मंत्रियों के साथ-साथ सांसदों-विधायकों और अन्य रसूखदारों के बच्चों के एडमिशन भी फर्जी तरीके से कराए गए। श्री चोपड़ा का कहना है कि उपरित के बयान के आधार पर उन मंत्रियों के खिलाफ भी प्रकरण दर्ज किए जाना चाहिए, जिन पर 10-10 करोड़ रुपए लेने के आरोप लगे हैं। वहीं इस महाघोटाले को उजार करने में शामिल डॉ. आनंद राय का कहना है कि ये तो अभी एक साल का ही मामला है। 2013 पीएमटी में भी 200 से अधिक बोगस एडमिशन कराए गए। उन्होंने एसटीएफ के तत्कालीन अधिकारियों पर भी आरोप लगाए कि उन्होंने रसूखदारों से सांठगांठ कर उन्हें जांच के दायरे से ही बाहर करते हुए क्लीनचिट दे दी। अब सीबीआई ने उनमें से कई आरोपियों को दबोचना शुरू किया है। एनआरआई कोटे के नाम पर भी बहुत बड़ा फर्जीवाड़ा हुआ, जिसमें प्रदेश के अधिकांश मेडिकल कॉलेज शामिल रहे हैं।
42 लाख लेने वाली रंजना चौधरी भी बची
अभी सीबीआई ने कुछ अफसरों को तो जांच के दायरे में लिया है, मगर अभी भी कई अफसर चंगुल से बाहर हैं। एसटीएफ ने व्यापमं के एक बड़े मास्टर माइंड और तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक पंकज त्रिवेदी को गिरफ्तार कर उससे पूछताछ की थी। इस मामले में नितिन महिन्द्रा ने भी चौंकाने वाले खुलासे किए थे। इन लोगों ने एसटीएफ को बताया कि घोटाले से जो राशि मिली, उसमें से आईएएस अधिकारी और कैट मेम्बर रंजना चौधरी को भी 42 लाख रुपए दिए गए। शुरुआत में तो एसटीएफ ने पंकज त्रिवेदी के इस बयान को सही मान जांच शुरू की, लेकिन जब ऊपर से दबाव पड़ा तो एसटीएफ ने प्री-पीजी 2012 के इस मामले में रंजना चौधरी को सरकारी गवाह बना डाला और बिना गिरफ्तारी के ही दो दिन तक नजरबंद रख पूछताछ तो की, लेकिन बाद में अचानक छोड़ दिया और फिर पूरा मामला एसटीएफ ने ठंडे बस्ते में डाल दिया। जानकारों का कहना है कि अब सीबीआई को इस पूरे मामले की बड़ी राजदार रंजना चौधरी को भी आरोपी बनाते हुए पूछताछ करना चाहिए। इससे और भी चौंकाने वाले राज खुलेंगे।
13 करोड़ की पेनल्टी लगाई निजी कॉलेजों पर
अभी सीबीआई ने पीएमटी 2012 के घोटाले में शामिल आरोपियों की चार्जशीट ही विशेष न्यायालय में दाखिल की है। इसमें अभी और भी आरोपी तो बनेंगे, वहीं उन निजी कॉलेजों पर भी कार्रवाई होगी, जिस पर 13 करोड़ रुपए की पेनल्टी आरोपित की गई। उल्लेखनीय है कि फीस नियंत्रण के लिए बनी एएएफआरसी ने कॉलेजों के खिलाफ ये पेनल्टी आरोपित की थी, जिसका गठन मध्यप्रदेश सरकार ने ही अपने गजट नोटिफिकेशन के जरिए किया था। 22 पेज की जांच रिपोर्ट शासन को सौंपते हुए इन मेडिकल कॉलेजों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की अनुशंसा भी की गई थी, मगर बाद में प्रदेश शासन के साथ-साथ एसटीएफ ने इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की। अब सीबीआई ने लिए यह मामला इसलिए साफ है क्योंकि यह घोटाला तो कागजों पर ही प्रदेश सरकार खुद सिद्ध कर चुकी है।

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