सीडी की सीढ़ी हमाम का सच

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नेता जीतकर जनता से परफॉर्में दिखाने का बढ़-चढक़र वादा करते हैं, बाद में पब्लिक की अपेक्षाओं की बजाय उनकी परफॉर्मेंस सीडी में दिखती है। पब्लिक उन्हें सदनों में कुछ करने की मुद्रा में देखना चाहती है, वे सीडियोचित मुद्रा में पाए जाते हैं। हालांकि, ऐसी सीडियों का नेताओं पर नैतिक प्रेशर के रूप में कोई खास महत्व नहीं। सीडी से कभी किसी नेता को डरते नहीं देखा गया। बल्कि सीडी के बाद वह पहले से भी ज्यादा आत्मविश्वासी हो जाता है। पहले झूठ बोलकर कुछ करता नहीं था, बाद में कुछ करके झूठ बोलने लगता है। सीडी में सेक्स स्कैंडल हो तो बजाय शर्मिन्दगी से मुंह छुपाने के, नेता के सामने कई विकल्प खुल जाते हैं। एक तो सीडी आते ही वह यह कह सकता है कि जो सीडी में दिख रहा, वो मैं नहीं हूं।दूसरा, वह इसे अपने राजनीतिक विरोधियों का षड्यंत्र बताकर सहानुभूति बटोर सकता है। ऐसे कि वह पब्लिक की इतनी ज्यादा सेवा कर रहा था कि विरोधियों को बर्दाश्त न हो पा रहा है। तीसरा, सीना ठोककर कह सकता है कि मैं किसी भी जांच के लिए तैयार हूं। नेता को जांच पर फुल भरोसा होता है और पब्लिक को रिपोर्ट पर नहीं। इस दृष्टिकोण से देखें तो सीडी के बड़े आयाम हैं।पार्टी मंत्री को तत्काल हटाकर यह श्रेय ले सकती है कि अमुक पार्टी ने अपने सीडीधारी मंत्री को हटाने में चार घंटे लगाए, हमने आधे घंटे में ही हटा दिया। इस लिहाज से ये साढ़े तीन घंटे की स्पीड से ज्यादा संस्कारी हुए। भविष्य में संस्कार स्पीड और घंटों में मापे जा सकते हैं। नेताई कृत्य कैरेक्टर का पैमाना नहीं हैं, क्योंकि हमाम में सब नंगे हैं। पैमाना यह हो जाएगा कि फलां नेता की नौ मिनट की सीडी है, जबकि हमारे नेता की सिर्फ ढाई मिनट की। सो, पब्लिक साढ़े छह मिनट के गैप से हमारे कैरेक्टर का आकलन करे। दिन-प्रतिदिन सीडी नॉर्मल-सी बात होती जा रही है, आगे बतौर एंटरटेन्मेंट ही इनकी डिमांड रहेगी। फिर पार्टियां यह कहने लगेंगी कि हाय, महंगाई, गाय, जाम, जीडीपी, टमाटर, प्याज, गाली-गलौज, आतंक इतना ज्यादा मच गया है कि पब्लिक की बोरियत कम करने के लिए सीडी जारी करनी पड़ी है। यह तात्कालिक राहत है। प्रॉब्लम सॉल्व करके पब्लिक को राहत पहुंचाने की सोचें तो सदियां बीत जाएं। इसकी काट में विपक्ष या तो अपने नेताओं की सीडी बनवाएगा या फिर आरोप लगाएगा कि सरकार सीडी के अलावा भी कुछ और करके दिखाए।जो भी हो, दो-चार महीने में ऐसी सीडी आती रहे, तो पब्लिक को तात्कालिक समस्याओं से निजात मिल जाए, सरकारों को राहत-सी हो जाए।नेताओं के सीडियोचित कारनामों से पब्लिक के लिए सबक यह है कि भविष्य में नेता चुने तो पहले कन्फर्म कर लें, अन्यथा बाद में पब्लिक सरकार में परफॉर्मेंस ढूंढ़े और नेता सीडी में दिखाते पाए जाएं।
सुरजीत सिंह

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