हिंदी न्यूज़ – चीन के प्रोडक्ट से चिंतित मोदी सरकार! भारतीय उद्योगों पर असर की जांच शुरू- Why Indian Government worried about Chinese product-Narendra Modi-Xi Jinping

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सत्ता संभालने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चौथी बार चीन के दौरे पर गए हैं. लेकिन क्या वो वहां चीन को लेकर भारत की चिंता पर कोई बात करेंगे? भारत सरकार चीन के सामान से चिंता में है. भारतीय बाजार में चीन का सामान भरा पड़ा है. ऐसे में अपने उद्योगों का क्या होगा? चिंता इतनी कि सरकार चाइनीज उत्पादों का भारतीय उद्योगों पर प्रभाव की जांच करवा रही है.

वाणिज्य संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने राज्यसभा सदस्य नरेश गुजराल के नेतृत्व में इसकी जांच करवाने का फैसला लिया है. वह बताएंगे कि चीनी सामान का भारतीय उद्योगों के रोजगार सृजन और कमाई पर कैसे प्रतिकूल असर पड़ रहा है. नरेश गुजराल चार्टर्ड अकाउंटेंट और उद्योगपति हैं. वो पूर्व प्रधानमंत्री इंद्रकुमार गुजराल के बेटे हैं. कमेटी ने इस विषय पर जनता से राय भी मांगी थी.

सरकार ही नहीं इंडो-चाइना इकोनॉमिक एंड कल्‍चरल काउंसिल भी एक रिसर्च कर यह पता कर रहा है कि चीनी उत्पादों की वजह से भारत में किन-किन उद्योगों पर मार पड़ी है. दूसरी ओर यह एक बड़ी सच्चाई है कि भारत और चीन बड़े बिजनेस पार्टनर हैं.

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चीन के साथ हमारा व्यापार घाटा लगातार बढ़ रहा है. मतलब ये है कि हम चीन से आयात के मुकाबले उसे निर्यात बहुत कम कर पाते हैं. डायरेक्टरेट जनरल ऑफ कॉमर्शियल इंटेलीजेंस एंड स्टेटिक्स के मुताबिक वर्ष 2016-17 में चीन के साथ हमारा व्यापार घाटा 51.11 यूएस बिलियन डॉलर (3.32 लाख करोड़ रुपये) हो गया है. जो 2014-15 में 48.46 यूएस बिलियन (3.15 लाख करोड़ रुपये) डॉलर था. 2016-17 में हमने 61.28 यूएस बिलियन डॉलर (3.98 लाख करोड़ रुपये) के उत्पाद चीन से मंगाए. जबकि निर्यात महज 10.17 यूएस बिलियन डॉलर (66,105 करोड़ रुपये) का किया.

ये चिंता सिर्फ आंकड़ों की नहीं है, बल्कि इससे भारतीय उद्योगों पर असर भी पड़ता है. इस खाई का नकारात्मक असर नौकरियों पर पड़ता है. क्योंकि हम अपनी जरूरत की चीजें बनाने की जगह मंगाते हैं. चीन अपने यहां सामान बनाकर भारत में बेचने का काम करता है. वह निवेश में विश्‍वास नहीं करता. इससे हमें नुकसान है. उसने यहां पर निवेश नाम मात्र का किया है. वह अपने यहां सामान बनाकर भारत में बेचता है. इससे रोजगार उसके लोगों को मिलता है.

इंडो-चाइना इकोनॉमिक एंड कल्‍चरल काउंसिल के मेंबर सेक्रेट्री इरफान कहते हैं “हमने पाया है कि चीन ने टेक्सटाइल, खिलौना, वाइपर, मग, लाइटिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे हमारे उद्योगों को नुकसान पहुंचाया है. लेकिन इसकी बड़ी वजह भी है. भारत में बहुत ज्यादा टैक्स और हिडन चार्ज की वजह से यहां के उद्योगों में तैयार माल चीन से आयातित सामान से महंगा है.”

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इरफान के मुताबिक “सरकार ने मोबाइल कंपोनेंट पर इंपोर्ट ड्यूटी 12 से बढ़ाकर 30 फीसदी कर दी है. मतलब ये है कि चीन से आयात कम करने की कोशिश हो रही है. ताकि चीनी कंपनियां भारत में निवेश बढ़ाएं. सन् 2000 से 2016 तक 16 साल में चीन ने सिर्फ 10 हजार करोड़ का ही निवेश किया. इन आंकड़ों के आधार पर भारत में निवेश के मामले में उसका 17वां स्‍थान है. अब उसका निवेश थोड़ा बढ़ रहा है.”

इरफान का मानना है कि लंबे समय के लिए चीन से आयात ठीक नहीं है. हमें उनसे टेक्‍नॉलोजी लेनी चाहिए. उनका अनुभव बांटना चाहिए. चीन के साथ भारत में ज्‍वाइंट वेंचर लगाना चाहिए. इससे हमें उनसे कम कीमत में उत्‍पादन की समझ मिलेगी. हमारे यहां नई नौकरियों का अवसर बनेगा.

हम भारत में चीन के उत्‍पादों का आयात तभी कम कर सकते हैं जब अपने घरेलू मार्केट की डिमांड लोगों की परचेजिंग पावर के मुताबिक पूरी करने की हालत में होंगे. अभी हम अपने घरेलू मार्केट की मांग पूरी करने की हालत में नहीं हैं.

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भारत चीन से जो चीजें आयात करता है उनमें मोबाइल, टीवी, बर्तन, चार्जर, मेमोरी कार्ड, ऑटो एसेसरीज, बिल्‍डिंग मैटीरियल, सैनीटरी आइटम, किचन आइटम, टाइल्‍स, म्‍यूजिक उपकरण, मशीनें, इंजन, पंप, केमिकल, फर्टिलाइजर,  आयरन एवं स्‍टील, प्‍लास्‍टिक, बोट और मेडिकल एक्‍यूपमेंट शामिल हैं.

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