मोदी का 4 साल में चौथा चीन दौरा, 11वीं बार जिनपिंग से मुलाकात होगी

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पीएम मोदी जून में एक बार फिर चीन जाएंगे, यह 55वां विदेशी दौरा

भास्कर न्यूज | नई दिल्ली

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को दो दिन के लिए चीन रवाना हुए। मोदी का ये चार साल में चौथा चीन दौरा है। इसके साथ वह सबसे ज्यादा बार चीन जाने वाले भारतीय प्रधानमंत्री बन गए हैं। इससे पहले पूर्व पीएम मनमोहन सिंह तीन बार चीन गए थे। शुक्रवार को मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच वुहान शहर में बातचीत होगी। इसे ‘अनौपचारिक शिखर वार्ता’ नाम दिया गया है। पहली बार ऐसा हो रहा है, जब भारत और चीन के किसी नेता की बैठक के बाद कोई ज्वाइंट कॉन्फ्रेंस या मीडिया ब्रीफिंग नहीं होगी। इसके बावजूद दोनों के बीच कई अहम मुद्दों पर बातचीत हो सकती है। मोदी इस साल जून में एक बार फिर शंघाई को-ऑपरेशन ऑर्गेनाइजेशन की बैठक में शामिल होने चीन जाएंगे। मोदी की ये दूसरी स्टेट विजिट है। इसके अलावा वह वहां जी-20 और ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेने जा चुके हैं। जबकि 4 साल में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग सिर्फ एक बार भारत आए हैं। मोदी पीएम बनने के बाद 47 महीने में 55वीं बार विदेश दौरे पर हैं।

मोदी के प्रधानमंत्री बनने से पहले 67 साल में सिर्फ पांच प्रधानमंत्रियों ने चीन का दौरा किया था। इनमें जवाहरलाल नेहरू, राजीव गांधी, नरसिम्हा राव, अटल बिहारी वाजपेयी और मनमोहन सिंह शामिल हैं।

ले. जनरल एसएल नरसिम्हन, पूर्व रक्षा सलाहकार ले. जनरल विनोद भाटिया, वारफेयर स्टडीज के निदेशक

चीन में भारत के रक्षा सलाहकार रह चुके लेफ्टीनेंट जनरल एसएल नरसिम्हन कहते हैं कि नरेंद्र मोदी ऐसे पहले प्रधानमंत्री हैं, जिनके लिए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अनौपचारिक शिखर बैठक तय की है। प्रोटोकॉल पर बेहद ध्यान देने वाली चीनी राजनीति में यह बहुत बड़ा अपवाद है। चीन का राष्ट्रपति किसी दूसरे देश के प्रधानमंत्री के साथ शिखर बैठक करे, यह वाकई बड़ी कूटनीतिक घटना है। यह मोदी-जिनपिंग के बीच के निजी रेपो से संभव हो पाया है। अभी तक मोदी जब भी चीन की यात्रा पर आए, उनकी आधिकारिक मुलाकात प्रधानमंत्री ली केकियांग से होती रही थी। इसके बाद वह राष्ट्रपति जिनपिंग से मिलते थे। इसीलिए वुहान में अनौपचारिक शिखर बैठक तय की गई है। दरअसल, बीजिंग में बैठक होने से प्रोटोकॉल आड़े आ जाता। सेंटर फॉर ज्वाइंट वारफेयर स्टडीज के निदेशक लेफ्टीनेंट जनरल विनोद भाटिया ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति के बाद चीन ने मोदी के लिए यह प्रोटोकॉल तोड़ा है। जब प्रधानमंत्री के बजाए खुद राष्ट्रपति उनके साथ शिखर बैठक करेंगे। अमेरिका में प्रधानमंत्री का पद है ही नहीं। यह दुनिया के सबसे पावरफुल नेताओं में से दो की मुलाकात है।

प्रधानमंत्री मोदी दो दिन की अनौपचारिक यात्रा पर चीन के वुहान पहुंचे

इनसे पहले 67 साल में भारत के सिर्फ 5 प्रधानमंत्री 7 बार चीन गए थे

क्यों बार-बार चीन जा रहे

मोदी ने रवाना होने से पहले कई ट्वीट कर दौरे के कामयाबी की बात कही।

चीनी अखबार|मोदी-शी की बैठक नए युग की शुरुआत

सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने मोदी-शी जिनपिंग के बीच बैठक को दोनों देशों के रिश्ते में नए युग की शुरुआत बताया है। दोनों देशों में अविश्वास की भावना है, जो डोकलाम के बाद और बढ़ी है। बैठक से तनाव कम करने में मदद मिलेगी। नई दिल्ली तिब्बती अलगाववादियों को समर्थन दे रहा है। भारत-अमेरिका और जापान के साथ चीन की घेरेबंदी के लिए नाटो जैसा संगठन तैयार करने की कोशिश भी कर रहा है।

मोदी के लिए जिनपिंग प्रोटोकॉल तोड़ेंगे, पहली बार सीधे किसी दूसरे देश के नेता से मिलेंगे

कद बढ़ाने, विवाद सुलझाने और रुतबे की चाह

शंघाईसहयोग संगठन

जून में शंघाई को-ऑपरेशन ऑर्गेनाइजेशन (एससीओ) की बैठक होनी है। भारत काफी समय से इस संगठन में अपना कद बढ़ाना चाहता है, इसलिए मोदी और जिनपिंग के बीच होने वाली मुलाकात के गहरे मतलब निकाले जा रहे हैं। इसमें पीएम मोदी, शी जिनपिंग से भारत की संगठन में भागीदारी बढ़ाने की वकालत कर सकते हैं।

मतभेद|बेल्ट एंड रोड पर दोनों के रुख में बदलाव की संभावना कम

चीन, भारत को अपने 3.7 लाख करोड़ रुपए के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव में शामिल करना चाहता है। पर वह एनएसजी में भारत की सदस्यता का समर्थन और जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को ग्लोबल टरेरिस्ट लिस्ट में शामिल करने को लेकर रोड़ा अटकाता रहा है। वहीं, भारत बेल्ट एंड रोड को संप्रभुता में दखल मानता है। इसमें शामिल होने से मना भी कर चुका है।

अर्थशास्त्र |चीन का भारतीय मोबाइल मार्केट पर 56 फीसदी कब्जा है

चीन ने भारत में 10.68 लाख करोड़ रुपए से अधिक का निवेश किया है। चीन 2008 में ही भारत का सबसे बड़ा बिजनेस पार्टनर बन गया था। भारतीय मोबाइल मार्केट पर चीन का 56% का कब्जा है। दिल्ली मेट्रो में चीनी कंपनी काम कर रही है। भारतीय सोलर मार्केट और थर्मल पावर सेक्टर चीनी कंपनियों पर ही निर्भर हैं। पावर सेक्टर के 70-80% उत्पाद चीन से आते हैं।

डोकलामविवाद

मोदी-जिनपिंग की इस अनौपचारिक शिखर वार्ता को डोकलाम विवाद के बाद दोनों देशों के रिश्तों में आई कड़वाहट दूर करने की कोशिश भी समझी जा रही है। इसमें 2 साल से संबंधों में आई तल्खी को दूर करने और रिश्तों को और मजबूत करने की पहल संभव है। आर्थिक गतिविधि बढ़ाने पर भी बात हो सकती है।

चीन, भारत का सबसे बड़ा बिजनेस पार्टनर

कूटनीति|1988 में राजीव गांधी के दौरे से की जा रही मोदी की तुलना

मोदी के इस दौरे की तुलना 1988 में तत्कालीन पीएम राजीव गांधी के दौरे से की जा रही है। तब राजीव ने 1962 के युद्ध के बाद रिश्तों में आई तल्खी को दूर करने की कोशिश की थी। ये 34 साल बाद किसी भारतीय पीएम का चीन दौरा था। अब मोदी का ये डोकलाम विवाद के बाद हो रहा है। इसके चलते दो साल से दोनों देशों के रिश्ते सामान्य नहीं हैं।

कारोबार|चीन से भारत सालाना 3.5 लाख करोड़ का सामान आयात करता है

चीन से भारत सालाना 3.5 लाख करोड़ रु. का आयात करता है, जबकि चीन 1.06 लाख करोड़ का ही सामान भारत से आयात करता है। चीनी अर्थव्यवस्था करीब 767.63 लाख करोड़ रु. की है, जबकि भारत की अर्थव्यवस्था 173.55 लाख करोड़ की है। चीन का विश्व के आर्थिक विकास में 33% योगदान है। अमेरिका के साथ चीन का सालाना व्यापार 28.63 लाख करोड़ रु. है।

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह 10 साल में तीन बार चीन गए थे

एनएसजी सदस्यता

बैठक के लिए एजेंडा घोषित नहीं है। पर इसमें डोकलाम के अलावा वास्तविक नियंत्रण रेखा पर शांति, चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव, एनएसजी सदस्यता, व्यापार और भारत में चीनी निवेश पर बातचीत हो सकती है। चीन 2013 में बॉर्डर डिफेंस को-ऑपरेशन एग्रीमेंट पर अलग फ्रेमवर्क का प्रस्ताव रख सकता है।

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