मिस्ट्री… नासा के लिए रहस्य बने आर्कटिक के गड्‌ढे, वैज्ञानिकों ने रखी अपनी-अपनी राय

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अमेरिकी एजेंसी नासा को कुछ दिन पहले सूचना मिली कि आर्कटिक में ऐसे गड्‌ढे हो रहे हैं, जिनका आकार लगातार बढ़ रहा है। उसके कारणों का पता लगाने के लिए वैज्ञानिक जॉन सोन्टेग को रिसर्च प्लेन के साथ वहां भेजा गया। उन्होंने विशाल गड्‌ढों वाले क्षेत्र को चिन्हित किया। उन्होंने कहा, इसका फिलहाल कोई कारण स्पष्ट नहीं है, लेकिन संभव है कि बर्फ की मोटी परत के नीचे सील्स होते हैं, जो पलायन करते हैं। वे सांस लेने के लिए मुंह से बर्फ में छेद करते हैं। सील की एक प्रजाति रिन्ग्ड होती है, जो अपने मुंह से बर्फ में 7 फीट तक गहरा छेद करने में सक्षम होती है। कई वैज्ञानिकों के अलग-अलग मत हैं, इसलिए इनके अध्ययन से ही मूल कारण सामने आएंगे।

एक अन्य वैज्ञानिक ने बताया कि गड्‌ढे का आकार बढ़ने का कारण सतह के ऊपरी हिस्से की बर्फ पिघलना है। ऐसा तब होता है, जब परत का निचला हिस्सा कमजोर हो जाता है। कुछ अन्य वैज्ञानिकों ने इन गड्‌ढों का अलग कारण बताया है। उनके अनुसार एक थ्योरी यह है कि बर्फ की परत के निचले हिस्से में गर्म पानी का स्रोत होने से परत में गड्‌ढा होने लगता है। या फिर उस जगह पर किसी पहाड़ से बहने वाले पानी का रिसाव हो रहा हो। earthobservatory.nasa.gov

 

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