खुफिया रिपोर्ट से भाजपा में हडक़ंप: भाजपा के 61 विधायकों का जीतना मुश्किल, भाजपा के 61 विधायकों का जीतना मुश्किल

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भोपाल। गुजरात चुनाव के ठीक बाद मध्यप्रदेश में भी सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी के लिए हालात अनुकूल नहीं हैं। यहां पार्टी के वे विधायक परेशानी खड़ी कर रहे हैं जिनका परफारमेंस बेहद कमजोर है। राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के दौरे के पहले आरएसएस ने विधायकों का सर्वे करवाया था, जिसमें 77 विधायकों की स्थिति ठीक नहीं बताई गई थी। ऐसे ही हालातों से सरकार को खुफिया एजेंसी ने भी अवगत कराया है।

खुफिया रिपोर्ट में कहा गया है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान तो प्रदेशभर में लोकप्रिय हैं लेकिन मौजूदा विधायकों में से 61 दोबारा जीतने की स्थिति में नहीं है वहीं 24 सीटों पर कांटे की टक्कर बताई गई है। सूत्रों की माने तो परफॉर्मेंस के मोर्चे पर शिवराज कैबिनेट के दर्जन भर मंत्री भी डेंजर जोन में हैं। सूत्रों का दावा है कि आधा दर्जन के लगभग काबीना और इतने ही राज्यमंत्री 2018 में चुनाव नहीं जीत पाएंगे। पार्टी सूत्रों के मुताबिक आरएसएस और खुफिया रिपोर्ट के बहुत सारे तथ्य मिलते-जुलते हैं । इस कारण अब नए सिरे से जनवरी 2018 में एक बार फिर सर्वे करवाया जाएगा, जिसके बाद पार्टी कमजोर विधायकों का विकल्प चुनेगी ।मध्यप्रदेश विधानसभा में भाजपा के सदस्यों की संख्या 165 है।
शिवराज की लोकप्रियता बरकरार, विधायकों के घटते ग्राफ पर करना होगा विचार
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शिवराज सरकार ने राज्य की सभी 230 सीटों का मिजाज जानने के लिए खुफिया रिपोर्ट तैयार कराई थी। इस रिपोर्ट ने सरकार की परेशानी को कम करने के बजाए बढ़ा दिया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मुख्यमंत्री के रूप में शिवराज सिंह चौहान की लोकप्रियता में कोई कमी नहीं नजर आ रही है, लेकिन विधायकों के प्रति नाराजगी और स्थानीय मुद्दों के कारण पार्टी की हालत अच्छी नहीं है। रिपोर्ट में बताया गया है कि 61 विधायक दोबारा चुनाव जीतने की स्थिति में नहीं है। रिपोर्ट में 24 सीटों को भी खतरे में बताया गया है। यहां कांटे की टक्कर बताई गई है। खुफिया रिपोर्ट इसलिए भी सही मानी जा रही है, क्योंकि कुछ महीने पहले पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के भोपाल दौरे के पहले संघ ने भी ऐसा ही एक सर्वे किया था। बताया जा रहा है कि इस सर्वे में करीब 77 विधायकों का परफार्मेंस खराब बताते हुए उनके विधानसभा क्षेत्र में पार्टी को कमजोर बताया गया था। माना जा रहा है कि दो सर्वे रिपोर्ट के बाद अगले महीने यानी जनवरी 2018 में पार्टी एक बार फिर जमीनी हालातों का आकलन करेगी और इसके बाद से मौजूदा विधायक को टिकट देने या उनके विकल्प की रणनीति पर काम शुरू हो जाएगा।
मालवा के कई विधायक की हालत पतली
मालवा के प्रमुख शहरों रतलाम, मंदसौर, नीमच, झाबुआ और आलीराजपुर में फिलहाल भाजपा ने 18 सीटों पर कब्जा जमा रखा है। इनमें 11 सीट तो ऐसी है जहां भाजपा दो बार से लगातार जीत रही है। हालांकि ,संसदीय चुनाव में भाजपा को झाबुआ, आलीराजपुर और रतलाम ग्रामीण में अपनी बढ़त को बरकरार रखने में कामयाबी नहीं मिली थी। अब गुजरात इफेक्ट को लेकर संगठन फिर से रिपोर्ट को खंगालने में जुटा है। भाजपा की हालत 14 विधानसभा सीटों पर कमजोर हो गई है, विधायक संगठन से तय मापदंड के आधार पर 29 से 35 नंबरों के बीच ला पाए है और ये खतरे की घंटी है। इसमें मालवा के कई विधायक की हालत पतली हो गई है। इनमें मालवा के प्रमुख जिलों में रतलाम, मंदसौर, नीमच झाबुआ और आलीराजपुर में हालात सबसे खराब है। ज्यादातर विधायक सरकार के पासिंग मार्क-35 नंबर तक भी नहीं पहुंच पाए हैं। परफार्मेंस पर तैयार संगठन की रिपोर्ट में रतलाम शहर से विधायक और राज्य योजना आयोग के उपाध्यक्ष चैतन्य काश्यप को 31 मिले है। जबकि रतलाम जिले से ही आलोट से केन्द्रीय मंत्री थावरचंद गेहलोत के पुत्र विधायक जीतेन्द्र गेहलोत को सबसे ज्यादा 43 अंक मिले है। जावरा विधायक डा. राजेंद्र पांडेयर को 31 नंबर प्राप्त हुए है। वहीं, सैलाना विधायक संगीता चारेल को महज 28 तथा रतलाम ग्रामीण विधायक मथुरालाल डामर को 29 नंबर ही मिल पाए है। दोनों ही विधायकों का टिकट काटा जा सकता है।मंदसौर और नीमच की 7 विधानसभा सीटों में से 5 पर भाजपा की हालात ठीक नहीं है। मंदसौर विधायक यशपाल सिंह सिसोदिया 41, मल्हारगढ़ विधायक जगदीश देवड़ा 34, गरोठ विधायक चंदरसिंह सिसोदिया 34 नंबर ही ला पाए है। वहीं नीमच विधायक दिलीपसिंह परिहार 36, मनासा विधायक कैलाश चावला 32 और जावद विधायक ओमप्रकाश सखलेचा 38 नंबरों के साथ ग्रेस लाकर परफार्मेंस रिपोर्ट में नंबर पाए है। यह हालत केवल मालवा की नहीं है, पूरे प्रदेश के ज्यादातर विधायक पासिंग मार्क भी नहीं पा रहे हेै। हालांकि अधिकृत तौर पर पार्टी इसे महज कवायद करार देती है। पार्टी नेताओं की माने तो संगठन ने परफार्मेंस के आधार पर आगामी विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार बदलने पर भी विचार करना शुरू कर दिया है।
ये भी डेंजर जोन में
मुरैना जिले की कुल छह में से चार सीटें भाजपा के पास हैं, इनमें तीन की स्थिति कमजारे आंकी गई है। इसी तरह भिंड, ग्वालियर, गुना और दतिया की मौजूदा दो-दो, शिवपुरी की एक, सागर की कुल आठ में सात भाजपा के पास हैं, इनमें पांच पर मौजूदा विधायकों को टिकट दिया तो हार जाएंगे जैसे हालात माने जा रहे हैं। टीकमगढ़ की कुल तीन में दो, छतरपुर की पांच में चार, दमोह की तीन में दो, पन्ना की दोनों, सतना की दो, रीवा की तीन, सीधी की एक, सिंगरौली की दोनों, शहडोल की दोनों, अनूपपुर की एक, उमरिया की दोनों, कटनी की तीन, जबलपुर की पांच, डिंडोरी-मंडला की दो, बालाघाट की दो, सिवनी की एक, नरसिंहपुर की तीन, छिंदवाड़ा की तीन, बैतूल की चार, हरदा की एक, होशंगाबाद की तीन, रायसेन की दो, भोपाल, विदिशा और सीहोर की दो-दो, राजगढ़ की तीन, शाजापुर और आगर की दो-दो, देवास की सभी पांच में तीन पर मौजूदा विधायकों के परफॉर्मेंस लचर करार दिया गया है।
जनता की नाराजगी के मुद्दे
ठ्ठ प्रदेश के कई क्षेत्रों में अब भी किसान नाराज हैं । इसकी वजह कर्ज तो है ही साथ में फसल का सही मूल्य न मिल पाना और स्थानीय स्तर पर सरकारी एजेंसियों के असहयोग ने इसमें आग में घी का काम किया है।
ठ्ठ महिला असुरक्षा के मुद्दे ने भी प्रदेश में गलत संदेश दिया है। कानून व्यवस्था और पुलिस की कमजोर व्यवस्था से भी महिलाएं नाखुश हैं।
ठ्ठ स्थानीय स्तर पर जनता विधायकों से नाराज है। उसकी वजह ये है कि चुनाव के बाद से कई विधायकों ने जनता के हालचाल लेना भी वाजिब नहीं समझा।
ठ्ठ कई विधायकों की सम्पत्ति कई गुना बढ़ गई। आम लोगों में विधायकों के बदले हालात को लेकर नाराजगी है।
ठ्ठ कई जगह विधायकों के अहंकारी बोल और उनके परिजनों का अमर्यादित व्यवहार ने लोगों को परेशान किया । लक्जरी गाडिय़ों में कांच बंद कर चलना जनता को नागवार लगा। इसने भी जनता से दूरियां बढ़ाई।
इन बिन्दुओं पर ली जानकारी
क्षेत्रीय मतदाताओं से मेलजोल और उपलब्धता
विकास संबंधी कामकाज की स्थिति
पार्टी कार्यकर्ताओं से संबंध
परिवार संगठन के साथ तालमेल
प्रवास और संपर्क के मामले में सक्रियता
अधिकारी और जनता से व्यवहार
क्षेत्रीय मतदाताओं में विधायक की छवि।

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